21> নিজের প্রার্থনা::---++(2)
প্রতিদিন সকাল বিকেল প্রার্থনা করো::--
হে ঈশ্বর আমি ধন-সম্পদ বা সমৃদ্ধি
কিছুই চাইনা,
আমাকে এমন প্রজ্ঞা দাও যার দ্বারা আমি
ন্যায় -অন্যায়ের অৰ্থক্য বুঝতে পারি।
আমার কথায় ও কাজে যেন কেউ দুঃখ না পায় কারুর যেন কোন ক্ষতি না হয়।
আমাকে নিঃ স্বার্থ ভাবে কাজ করার এবং যে কোন কঠিন পরিস্থিতিতেও যেন ধৈর্য্য না হারাই এমন শক্তি দাও।
হে প্রভু আমাকে এমন শক্তি দাও যাতে
আমি যে কোন অভাবী দুস্থ মানুষকে যেন সর্বোতভাবে সাহায্য করতে পারি।
হে প্রভু আমাকে এতটা সন্তুষ্টি দাও যাতে আমি অন্যের উন্নতি দেখে ঈর্ষান্বিত না হই।
আমি যেন কোনভাবে কখনো অহংকারী না হই।
আমি যেন সকল জীবের বেদনা অনুভ করতে পারি।
হে প্রভু আমি যেন আজীবন তোমার আশ্রয়েই থাকতে পারি,
হে প্রভু আমি এই ক্ষণে আমার মন প্রাণ সকলি তোমার চরণ কমলে অর্পণ করলাম আমাকে সঠিক পথ দেখাও।
মম নতিরেষা তব পদকমলে,
প্রণমামি মুহুর্মুহুঃ তব চরণ কমলে।
হর হর মহাদেব।
জয় শিবসম্ভু।
ওঁ নমঃ শিবায়,ওঁ নমঃ শিবায়,
ওঁ নমঃ শিবায়,
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हर रोज सुबह-शाम प्रार्थना करो:
हे ईश्वर, मैं धन-संपद या समृद्धि
कुछ भी नहीं चाहिए,
मुझे ऐसा ज्ञान प्रज्ञा दीजिये जिसके द्वारा मैं
न्याय और अन्याय का अंतर समझ सकता हूँ,
मेरी बातों और कर्म से किसी को ठेस न पहुंचे, किसी को भी नुकसान नहीं हों।
मुझे निस्वार्थ भाव से काम करने की शक्ति दीजिए, और किसी भी कठिन परिस्थिति में धैर्य न खोएं।
हे प्रभु, मुझे ऐसी शक्ति दीजिए कि मैं किसी भी जरूरतमंद या संकटग्रस्त और लाचार व्यक्ति को हर संभव तरीके से मदद करने की शक्ति दीजिए।
हे प्रभु, मुझे इतनी संतुष्टि प्रदान करें कि मैं दूसरों की प्रगति से ईर्ष्या न करूं।
मैं कभी भी किसी भी तरह से अहंकारी न बनूँ।
काश मैं सभी प्राणियों के दर्द महसूस कर सकूँ।
हे प्रभु, मुझे सदा आपकी शरण में रहने की कृपा प्रदान करें। मैंने अपना मन, प्राण और सब कुछ आपकी चरण कमलों में अर्पित कर दिया है, मुझे सही रास्ता दिखाइए।
मम नतीरेषा तबचरणकमले।
आपके चरण कमलों में मेरा बार-बार प्रणाम।
हर हर महादेव।।
जय शिव शंभू।।
ॐ नमः शिवाय,ॐ नमः शिवाय,ॐ नमः शिवाय।।
<---- आद्यनाथ राय चौधुरी ---->
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আমার আমিত্ব গেলেই ঈশ্বর সাক্ষাৎ হয়।
আমার আমিত্বই দেহ মনে আগুন জ্বালে,
আমার আমিত্ব ঘুচলেই ঈশ্বর রূপ শক্তির সাক্ষাৎ মেলে।
ঈশ্বর এক অসীম শক্তি, যে যেমন রূপে তাকে মনে ধরে, তার কাছে সেই শক্তি তেমন রূপেই সাক্ষাৎ হয়।
जीवन में अहंकार तथा अहम भाव दूर होनेसे ही
ईश्वर साक्षात् तथा प्रत्यक्ष होते है।
मै रूप अहंकार सेही शरीर और दिमाग में आग लगी हुई है,
अहंकार बोध त्याग होनेसे ही ईश्वर रूप शक्ति की साक्षात् होते है।
ईश्वर एक असीम शक्तिर आधार उनकी साक्षात्
होना कोई मामूली बात नहीं, हिम्मत चाहिए।
शक्ति को धारण के लिए ज्ञान एवं शक्ति संचय करणा जरूरी।
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क्षमता लोगों को बड़ा दिखा सकती है,
लेकिन चरित्र ही इंसान को वास्तव में महान बनाता है।
सम्मान भीख मांगने से तथा मुफ़त में नहीं मिलता है,
इसे चरित्र के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।
<---आद्यनाथ राय चौधुरी --->
अज्ञानी व्यक्ति की शक्ति खतरनाक होते है,
शक्ति मनुष्य को क्षमता देती है,
लेकिन ज्ञान उसे सही रास्ता दिखाता है।
विवेकहीन शक्ति अक्सर विनाश की ओर ले जाती है।
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